दुबई में बैठा बदमाश प्रिंस खान और उसके गुर्गों की संपत्ति होगी जब्त, आयकर विभाग जुटा रहा जानकारी
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!धनबाद : दुबई से आपराधिक गिरोह का संचालन करने वाले कुख्यात बदमाश प्रिंस खान और उसके गैंग पर शिकंजा कसने लगा है। पुलिस रिमांड पर लिए गए प्रिंस खान गैंग के तीन गुर्गों से जहां पुलिस पूछताछ कर रही है, वहीं अब आयकर विभाग की टीम भी सक्रिय हो गई है।
शुक्रवार को आयकर विभाग ने रिमांड पर लिए गए परवेज खान, सैफ आलम उर्फ राशिद और तौशिफ आलम उर्फ मूसा से घंटों पूछताछ की। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि प्रिंस ने कितनी अवैध संपत्ति अर्जित की है और कहां-कहां निवेश किया गया है।
पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त पूछताछ जारी
इससे पहले पुलिस ने भी तीनों आरोपितों से लंबी पूछताछ की। इस दौरान रंगदारी वसूली के कई नए स्रोतों का खुलासा हुआ है।
शहर के कई बिल्डर, जमीन कारोबारी, ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, कोल माफिया और होटल व्यवसायी अब जांच के दायरे में आ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये सभी हर महीने “सुरक्षा के नाम पर” प्रिंस खान को रंगदारी की रकम देते थे।
पुलिस का कहना है कि यह रकम पहले स्थानीय सहयोगियों के माध्यम से एकत्र की जाती थी और बाद में हवाला और क्रिप्टो चैनल के जरिए दुबई भेजी जाती थी। वहां से प्रिंस खान और उसका भाई गोपी खान गिरोह का संचालन करते थे।
आयकर विभाग जांच में जुटा
आयकर विभाग ने बरामद नकदी, एटीएम कार्ड और जमीन के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
टीम यह पता लगा रही है कि करोड़ों रुपये की यह रकम किन कारोबारों से जुड़ी है और क्या इसके पीछे हवाला नेटवर्क सक्रिय था।
विभाग ने आरोपितों के बैंक खातों, एटीएम ट्रांजेक्शन और जमीन सौदों के कागजात को खंगालना शुरू कर दिया है।
100 सहयोगियों की सूची पुलिस के पास
पुलिस रिमांड के दौरान तीनों आरोपितों ने करीब 100 सहयोगियों के नाम बताए हैं, जो आर्थिक रूप से प्रिंस खान को मदद पहुंचाते थे।
इनमें रियल एस्टेट कारोबारी, भवन निर्माण ठेकेदार, कोयला परिवहन कारोबारी और व्यापारी शामिल हैं।
पुलिस अब सभी नामों के सत्यापन और आर्थिक लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
भूली के कुछ जमीन कारोबारी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जो प्रिंस के नाम पर जमीन का कारोबार चलाते थे।
बरामदगी से खुली नेटवर्क की परतें
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के पास से
₹17 लाख 34 हजार 900 नकद, एक पिस्टल, 47 कारतूस, 70 जमीन के डीड, 18 एटीएम कार्ड और 8 मोबाइल फोन बरामद किए थे।
मोबाइल की कॉल डिटेल्स और बैंक खातों के विश्लेषण से कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं।
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने जमीन कारोबार को रंगदारी की रकम वैध दिखाने का जरिया बना रखा था। करोड़ों रुपये के सौदे “इन्वेस्टमेंट” के नाम पर किए जा रहे थे।
नेटवर्क तोड़ने की कोशिश में जुटी पुलिस
एसएसपी प्रभात कुमार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गिरोह के आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए।
पुलिस को रिमांड के दौरान जो भी नई जानकारियां मिल रही हैं, उनका सत्यापन किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में कई बड़े कारोबारियों की गिरफ्तारी भी संभव है