छठ पर्व की छाया में मातम — बिहार में डूबने से 102 लोगों की मौत, कई अब भी लापता

 

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छठ पर्व की छाया में मातम — बिहार में डूबने से 102 लोगों की मौत, कई अब भी लापता

पटना :
छठ पर्व के दौरान जहां एक ओर श्रद्धा और भक्ति का सागर उमड़ा, वहीं दूसरी ओर नदियों और तालाबों से आती मौत की खबरों ने पूरे बिहार को झकझोर दिया।
नहाय-खाय, घाट सफाई और अर्घ्य के दौरान कई जगह दर्दनाक हादसे हुए — कहीं तेज बहाव ने किसी को बहा लिया, तो कहीं गहरे पानी ने श्रद्धालुओं को अपनी लहरों में समा लिया।

राजधानी पटना जिले में सबसे ज्यादा 13 लोगों की जान गई।
मोकामा, बिहटा, खगौल, मनेर और नौबतपुर इलाकों में कई श्रद्धालु डूब गए।
मोकामा में एक ही परिवार पर दोहरी मार पड़ी — भाई के डूबने की खबर सुनकर बहन ने सदमे में दम तोड़ दिया।

उत्तर बिहार में मासूमों की जान गई — 26 मौतें

उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, दरभंगा, पूर्वी चंपारण और समस्तीपुर जिलों में कुल 26 लोगों की मौत हुई है।
इनमें ज्यादातर बच्चे और किशोर शामिल हैं, जो घाटों पर परिजनों के साथ पूजा करने गए थे।
कई बच्चे घाट की सफाई या दीपदान के दौरान फिसलकर गहरे पानी में चले गए।

कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार में 32 मौतें

छठ के दौरान सबसे दर्दनाक दृश्य कोसी और सीमांचल इलाकों में देखने को मिले।
सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, बांका, खगड़िया और भागलपुर जिलों से कुल 32 मौतों की पुष्टि हुई।
मधेपुरा और भागलपुर में 7-7 लोग, पूर्णिया में 4, सहरसा में 3 और सुपौल में 2 लोगों की जान गई।
कई परिवार अब भी अपने लापता सदस्यों को ढूंढ़ रहे हैं। प्रशासन और गोताखोरों की टीमें रातभर खोज अभियान में लगी रहीं।

नालंदा और वैशाली में 15 की मौत

नालंदा और वैशाली जिलों में डूबने की घटनाओं ने प्रशासन को झकझोर दिया।
हिलसा थाना क्षेत्र के सिपारा गांव में दो महिलाओं समेत तीन लोगों की मौत हुई, एक लापता है।
वैशाली में 8 लोगों की जान गई — राघोपुर में तीन, जबकि बिदुपुर, महनार, देसरी और भगवानपुर में एक-एक व्यक्ति डूब गया।
गोपालगंज में दो चचेरे भाइयों, और गया जिले में एक युवक की मौत की पुष्टि हुई है।

प्रशासन अलर्ट लेकिन सवाल बाकी

राज्य सरकार ने पहले ही जिला प्रशासन को अलर्ट रहने और घाटों पर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए थे,
लेकिन 102 लोगों की जान जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी थे?
क्या असुरक्षित घाटों और रोशनी की कमी से ये हादसे हुए?
या फिर श्रद्धालुओं की लापरवाही ने इन मासूम जिंदगियों को निगल लिया?

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