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लानत है झारखंड की स्वास्थ्य ब्यवस्था पर , जब एक मंत्री को इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ रहा तो आम जनता अपना इलाज कैसे करवायेगी झारखण्ड में , जिस जनता के वोट से जीतते है डॉ इरफान अंसारी जैसे स्वास्थ्य मंत्री , वो जनता जिसको खाने कमाने के लिए फुटपाथ से भी भगा दिया जाता है ।। वो जनता जो अपने खाने केलिए फुटपाथ पर दुकान लगती हो वो इलाज के लिए दिल्ली कैसी जाएगी।।
जब राज्य का एक मंत्री भी इलाज के लिए दिल्ली भाग रहा हो, तो सोचिए आम जनता की क्या हालत होगी!
डॉक्टर इरफान अंसारी जैसे स्वास्थ्य मंत्री जिस जनता के वोट से चुनकर सत्ता में आते हैं, वही जनता झारखंड के अस्पतालों में इलाज के नाम पर सिर्फ फॉर्मेलिटी झेलती है।
अगर राजधानी रांची या जिला अस्पतालों पर भरोसा नहीं, तो फिर गांव-कस्बों के हालात का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं।
आम आदमी…
…जो रोज़ी-रोटी के लिए फुटपाथ पर दुकान लगाता है, जिसे पुलिस-प्रशासन वहां से खदेड़ देता है…
…उसके लिए दिल्ली जाना तो दूर, एक ढंग की सरकारी दवा तक मिलना भी मुश्किल है।
क्या यही है “जनता का राज”?
क्या मंत्री और आम जनता के लिए अलग-अलग स्वास्थ्य सिस्टम होंगे?