संगम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ पुलिस की धक्का-मुक्की, बिना स्नान लौटे धर्मगुरु

संगम पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद जी के साथ पुलिस की धक्का-मुक्की, बिना स्नान लौटे धर्मगुरु

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प्रयागराज | विशेष रिपोर्ट
संगम पर सोमवार सुबह उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने लगभग 100 शिष्यों, साधुओं और समर्थकों के साथ संगम स्नान के लिए पहुंचे।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शंकराचार्य सुबह करीब 9 बजे पुल नंबर-2 के रास्ते संगम की ओर बढ़े। पुल बंद था, लेकिन शिष्यों द्वारा अनुरोध करने पर बाबा के लिए मार्ग खोला गया। संगम पहुंचने पर उनका स्वागत भी किया गया।


इसके बाद जब शंकराचार्य की पालकी संगम की ओर आगे बढ़ी, तो पुलिस ने संगम पुलिस चौकी के पास पालकी रोकने और आगे पैदल जाने का निर्देश दिया। समर्थकों का कहना है कि जहां पालकी रोकी गई और संगम स्थल के बीच की दूरी महज 50 मीटर के आसपास थी।


इसी बात को लेकर पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पुलिस ने एक-एक कर साधुओं और शिष्यों को पकड़कर खींचते हुए चौकी तक ले जाना शुरू किया। इस दौरान एक शिष्य को धक्का देकर गिराया गया, बाल पकड़कर खींचा गया और मारपीट की गई।


स्थिति बिगड़ने पर कई अन्य समर्थकों को भी हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान शंकराचार्य अकेले रह गए और उनके चारों ओर पुलिस, RAF और CISF का घेरा बना दिया गया।
करीब तीन घंटे तक चली बातचीत में शंकराचार्य इस बात पर अड़े रहे कि उनके लोगों को छोड़ा जाए और उन्हें सम्मानपूर्वक संगम स्नान कराया जाए। इसके बाद पुलिस ने कुछ नरमी दिखाई और समर्थकों को छोड़ा गया।


हालांकि जैसे ही पालकी आगे बढ़ी, फिर वही स्थिति उत्पन्न हो गई। पुलिस ने संगम की ओर जाने से रोक दिया और एक बार फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस बार शंकराचार्य के सभी लोगों को फिर से खींचकर चौकी में बंद कर दिया गया।


आरोप है कि इसके बाद शंकराचार्य की पालकी को कुछ लोगों ने धक्का मारते हुए संगम से लगभग 500 मीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया। इस दौरान उनका छत्र (धार्मिक प्रतीक) भी टूट गया, जिसे शंकराचार्य परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


शंकराचार्य ने बार-बार पूछा कि धक्का देने वाले लोग कौन हैं, लेकिन किसी ने अपनी पहचान नहीं बताई। समर्थकों का दावा है कि ये सभी सादी वर्दी में प्रशासन से जुड़े लोग थे।


अंततः शंकराचार्य को अक्षय वट पर अकेला छोड़ दिया गया और उन्हें बिना संगम स्नान किए वापस लौटना पड़ा। वहीं, उनके समर्थकों को पुलिस वाहनों में भरकर उनके आश्रम तक छोड़ा गया।


इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया और धार्मिक संगठनों में रोष देखा जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि हिंदू धर्म के एक शीर्ष धर्मगुरु के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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