हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बालू घाटों के आवंटन का रास्ता साफ, स्टे हटाया गया
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची: झारखंड में बालू कारोबार और निर्माण कार्यों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को बालू घाटों की नीलामी के बाद उनके आवंटन पर लगी रोक (स्टे) को हटा लिया है। इसके साथ ही राज्य में बालू घाटों के आवंटन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
यह मामला पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 – PESA से जुड़ा हुआ था।
आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने अवमानना याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने PESA नियमावली लागू किए बिना ही जनजातीय क्षेत्रों में बालू घाटों की नीलामी और आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी, जो ग्राम सभाओं के अधिकारों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने इस मामले की कई महीनों तक सुनवाई की थी।
सितंबर 2025 में अदालत ने PESA नियमावली लागू होने तक बालू घाटों और अन्य लघु खनिजों के आवंटन पर रोक लगा दी थी।
हालिया सुनवाई में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि PESA नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और इसे लागू कर दिया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने माना कि अब PESA नियम प्रभावी हो चुके हैं। इसके बाद कोर्ट ने पहले जारी स्टे को हटाते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
बालू घाटों की नीलामी पहले ही हो चुकी है, अब विक्रेताओं को जल्द आवंटन पत्र मिल सकेंगे।
राज्य में वैध रूप से बालू खनन शुरू होगा, जिससे बाजार में रेत की उपलब्धता बढ़ेगी।
निर्माण कार्यों की लागत कम होने की संभावना है, क्योंकि रोक के कारण रेत की कालाबाजारी और कीमतें बढ़ गई थीं।
राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलना शुरू होगा।
हालांकि, पर्यावरणविदों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि PESA नियमों का सही और पारदर्शी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है, ताकि जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के अधिकार सुरक्षित रहें और नदियों के पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बालू घाटों का आवंटन कितनी तेजी से होता है और इसका फायदा आम जनता तक कितनी जल्दी पहुंचता है।