छठ महापर्व: आस्था, सादगी और सामाजिक सौहार्द का अद्वितीय प्रतीक
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!चार दिनों तक चलने वाला ऐसा पर्व, जिसमें न कोई विवाद होता है, न कोई दंगा, न किसी प्रशासनिक सख़्ती की आवश्यकता। इंटरनेट बंद नहीं किया जाता, शांति समिति की बैठक नहीं बुलाई जाती, और न ही चंदे के नाम पर कोई गुंडागर्दी होती है। इस पर्व में न कोई जबरन उगाही होती है, न ही शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश देना पड़ता है।
छठ वह पर्व है जिसमें मिठाई की दुकानें मिलावट से मुक्त रहती हैं, जिसमें ऊंच-नीच का भेद नहीं होता, धर्म या समुदाय के नाम पर कोई भेदभाव नहीं होता। यहां कोई पुजारी नहीं, कोई दान-दक्षिणा का प्रचलन नहीं — बस श्रद्धा, सादगी और समर्पण की शक्ति होती है।
यह एकमात्र पूजा है जिसमें देवता प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित माने जाते हैं, जिसमें डूबते सूर्य को भी नमस्कार किया जाता है। इस पर्व की खासियत यह है कि व्रती किसी जाति या समुदाय से नहीं, बल्कि समाज की एकता और शुद्ध आस्था का प्रतीक होते हैं।
छठ के गीत, घर पर बने पकवान, और घाटों पर एक साथ खड़े अमीर-गरीब — सब इस पर्व की समानता और समरसता का जीवंत उदाहरण हैं। यहाँ कोई ऊँच-नीच नहीं, कोई भेदभाव नहीं — सिर्फ़ भक्ति, प्रकृति और माँ छठी माई के प्रति अटूट विश्वास।
छठ न केवल प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी जीवनदान देता है। मिट्टी के दीये, बाँस के सूप, फल-फूल, गुड़ और ठेकुआ — ये सब इस महापर्व से जुड़ी उस परंपरा का हिस्सा हैं जो भारतीय संस्कृति को जीवित रखती है।
Prime News 24 परिवार की ओर से आप सभी को छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह पर्व आपके जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आए।
छठ मइया की जय!