हाई कोर्ट का बड़ा फैसला – निजी स्कूल संचालकों को राहत
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हाई कोर्ट ने 2 मई के आदेश पर लगाई रोक, RTE नियमावली 2019 पूर्व के स्कूलों पर लागू नहीं होगी
झारखंड के निजी स्कूल संचालकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। रांची हाई कोर्ट की डबल बेंच — मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति दीपक रौशन — ने आज 14 अक्टूबर 2025 को 2 मई 2025 के आदेश पर स्टे लगा दिया है।
2 मई को हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मान्यता के लिए ₹25,000 का आवेदन शुल्क माफ रहेगा, मान्यता समिति 7 सदस्यीय होगी और ₹1 लाख सिक्योरिटी मनी माफ की जाएगी।
हालांकि, उसी फैसले में भूमि संबंधित बाध्यता को समाप्त नहीं किया गया था और कक्षाओं के मानक में भी कोई राहत नहीं दी गई थी।
सरकार पहले ही कोर्ट को यह बता चुकी थी कि RTE नियमावली 2019 पुराने (पूर्व से संचालित) स्कूलों पर लागू नहीं होती।
दरअसल, 5 मार्च 2021 को झारखंड सरकार द्वारा दिए गए एफिडेविट के पॉइंट नंबर 51(iii) में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि RTE नियम 2019 पुराने स्कूलों पर लागू नहीं होंगे, लेकिन 2 मई के निर्णय में इस बिंदु का उल्लेख नहीं किया गया था।
इसी को लेकर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन झारखंड के महासचिव प्रवीण दुबे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
आज की सुनवाई में एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता भानु कुमार और उनकी टीम ने विस्तृत बहस की, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
कोर्ट ने माना कि RTE नियमावली 2019 पुराने स्कूलों पर लागू नहीं होगी और 2 मई 2025 के आदेश पर रोक लगा दी।
अब जब तक अगला आदेश नहीं आता, सरकार किसी भी निजी स्कूल पर मान्यता के लिए दबाव नहीं बना सकेगी।
इस महत्वपूर्ण केस में GISA के प्रदेश अध्यक्ष अविनाश वर्मा, महासचिव सर्वेश दुबे और महासचिव प्रवीण दुबे समेत पूरी टीम की अहम भूमिका रही।
एसोसिएशन ने कहा कि यह फैसला सभी निजी स्कूल संचालकों के लिए जीत और राहत का संदेश है।