
टुंडी, धनबाद: टुंडी प्रखंड के ऐतिहासिक स्थल पंडुंगरी में सिद्धू-कान्हू की शहादत दिवस के मौके पर एक भव्य सांस्कृतिक व जनसभा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के हजारों लोग उपस्थित हुए। भीड़ का उत्साह देखते ही बनता था, जो अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देने और उनकी विरासत को जानने के लिए उमड़ी थी।
इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य गुरुचरण बस्की ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सिद्धू-कान्हू हमारे स्वाभिमान और संघर्ष के प्रतीक हैं। हमें उनके आदर्शों से सीख लेकर समाज को जागरूक करना होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और इतिहास को न भूलें।
वहीं लखींद्र हांसदा ने कहा कि संताल विद्रोह केवल एक इतिहास नहीं, बल्कि यह हमारी अस्मिता की पहचान है। आज भी यदि हम एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं तो समाज में बदलाव संभव है।
कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को भावविभोर कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में शिरकत की, जिससे कार्यक्रम की शोभा और बढ़ गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में एकता, संस्कृति की रक्षा और सिद्धू-कान्हू जैसे वीरों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था। आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा।
भीड़ का आंकड़ा लगभग 1000 से अधिक बताया गया, जिसमें युवा, महिलाएं, बुजुर्ग व बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल थे। आयोजकों ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों
की बात कही।