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रांची।
झारखंड में मादक पदार्थों के दुरुपयोग और अवैध अफीम की खेती को जड़ से समाप्त करने के लिए झारखंड पुलिस ने व्यापक स्तर पर सख्त मुहिम शुरू कर दी है। इसी क्रम में गुरुवार को झारखंड पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अवैध अफीम की खेती से सर्वाधिक प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया। इस दौरान वर्ष 2025 में अब तक की गई कार्रवाइयों, पिछले फसली वर्ष में नष्ट की गई अफीम की खेती के सत्यापन, दर्ज NDPS अधिनियम के मामलों की स्थिति और बड़े तस्कर व सरगनाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की गई।
साथ ही PIT NDPS एक्ट के तहत भेजे गए प्रस्तावों, जन-जागरूकता अभियानों और किसानों को वैकल्पिक खेती की ओर प्रेरित करने के प्रयासों पर भी गहन चर्चा हुई।
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
डीजीपी तदाशा मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध अफीम की खेती का विनष्टीकरण और ड्रग तस्करी पर रोक लगाना झारखंड पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि NDPS मामलों में फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज स्थापित कर पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई जाए, ताकि बड़े संचालकों पर निर्णायक कार्रवाई की जा सके।
ड्रोन सर्विलांस और विभागीय समन्वय
डीजीपी ने राजस्व, कृषि, वन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया। अवैध खेती की पहचान के लिए ड्रोन सर्विलांस के उपयोग को और बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा स्थानीय मुखिया, जनप्रतिनिधियों और महिला समितियों की मदद से जन-भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।
सरगनाओं की संपत्ति जब्ती पर सख्त निर्देश
बैठक में सबसे सख्त निर्देश ड्रग माफिया की संपत्ति जब्ती को लेकर दिए गए। डीजीपी ने कहा कि अवैध गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों की गहन जांच कर त्वरित जब्ती की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने और किसानों को अफीम की खेती छोड़ने के लिए लाभकारी वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
झारखंड पुलिस की यह सख्त मुहिम राज्य में ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
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