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गढ़वा (झारखंड):
गढ़वा की धरती पर इन दिनों एक अनकही कहानी चर्चा में है—एक ऐसी कहानी, जहाँ विकास की आड़ में जमकर धांधली हुई। मनरेगा की डोभा और कूप निर्माण योजनाओं के नाम पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं।
धुरकी और रमकंडा प्रखंड में कागजों पर मजदूरों के हाथ चलने थे, पर हकीकत में खेतों में गरज उठीं जेसीबी मशीनें। नियम साफ़ कहते हैं—“मनरेगा के तहत हाथ से काम होना चाहिए”, फिर भी मशीनों ने खेत जोते और इसी के साथ शुरू हुआ भ्रष्टाचार का खेल।
जिले के उपायुक्त दिनेश कुमार यादव ने जब इस गड़बड़ी पर नजर डाली तो सख्ती बरतते हुए ऐसा कदम उठाया कि कई कर्मियों की कुर्सियाँ हिल गईं।
👉 6 कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया
👉 6 का तबादला कर दिया गया
👉 1 को निलंबित कर दिया गया
👉 1 के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश जारी हुआ
धुरकी में जिन पर गाज गिरी उनमें दो ग्राम रोजगार सेवक, तीन कनीय अभियंता और एक लेखापाल शामिल हैं। वहीं प्रखंड पदाधिकारी से लेकर अभियंता तक कई अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है।
रमकंडा में तो हद ही हो गई—एक डोभा दो किलोमीटर दूर किसी और खेत में बन गया और उसकी लागत तीन गुनी दिखा दी गई। जब जवाब मांगे गए तो कोई ठोस सफाई नहीं मिल पाई।
DC यादव ने दो टूक कहा—
> “जनता की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। जवाबदेही तय होगी और दोषियों पर कार्रवाई जारी रहेगी।”
अब जिला प्रशासन के इस कदम के बाद गढ़वा में साफ संदेश गया है—
✅ नियमों से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं।
✅ जनता की योजनाओं पर अब कोई गड़बड़ी नहीं चलेगी।
✅ जवाबदेही तय होगी और हर गुनहगार को सज़ा मिलेगी।
गढ़वा में भ्रष्टाचार पर चली यह सख्त कलम अब दूसरों
के लिए भी चेतावनी बन गई है।