JSSC CGL पेपर लीक: ससुर के खाते में ₹14 लाख, साले के खाते में ₹5 लाख! CID ने कोर्ट में खोली लेन-देन की परत

 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

पेपर लीक की कथित सेटिंग के बाद ₹19 लाख के ट्रांजैक्शन का CID ने किया दावा, मोबाइल CDR और बैंक लेन-देन को बनाया आधार

📰 पूरी खबर

रांची। झारखंड JSSC CGL-2023 पेपर लीक मामले की जांच में CID ने वित्तीय लेन-देन को लेकर अदालत के समक्ष अहम जानकारी रखी है। धनबाद निवासी आरोपी दीपक कुमार की जमानत याचिका का विरोध करते हुए CID ने दावा किया कि परीक्षा में कथित सेटिंग के बाद उसके पारिवारिक सदस्यों के बैंक खातों में कुल ₹19 लाख ट्रांसफर किए गए।

CID के अनुसार, इसमें ₹14 लाख आरोपी के ससुर सुरेश राय के खाते में, जबकि ₹5 लाख उसके साले उमेश कुमार राय के खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी ने इन लेन-देन को कथित परीक्षा धांधली से जोड़ते हुए अदालत में इसका उल्लेख किया है।

💰 ससुर के खाते में ₹14 लाख, साले को ₹5 लाख

CID की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 22 जनवरी 2026 को दीपक कुमार के ससुर सुरेश राय के खाते में ₹14 लाख और साले उमेश कुमार राय के खाते में ₹5 लाख भेजे गए। एजेंसी का दावा है कि यह रकम कथित परीक्षा सेटिंग कराने वाले सिंडिकेट से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, इन लेन-देन का अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

🚨 साला भी गिरफ्तार, दुग्धा से जुड़ा कनेक्शन

CID ने दीपक कुमार के अलावा उसके साले उमेश कुमार राय तथा दो अन्य सफल अभ्यर्थियों आनंद कुमार सिंह और विजय कुमार तिवारी को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था।

जांच के अनुसार, उमेश कुमार राय मूल रूप से भोजपुर, बिहार का रहने वाला है और बोकारो के दुग्धा स्थित BCCL कॉलोनी में रहता था। CID का आरोप है कि इसी ठिकाने पर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को जुटाया गया और कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर याद करवाए गए।

📱 मोबाइल CDR से कई अभ्यर्थियों से संपर्क का दावा

CID ने अदालत को बताया कि दीपक कुमार के मोबाइल CDR के विश्लेषण में कई अभ्यर्थियों से उसके संपर्क में रहने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, परीक्षा केंद्र तक अभ्यर्थियों को पहुंचाने वाले वाहनों की व्यवस्था से भी उसका संबंध था।

🏢 परीक्षा एजेंसी ICN की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले की जांच में परीक्षा संचालन एजेंसी ICN के संचालक मिथिलेश सिंह का नाम भी सामने आया है। CID के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने में एजेंसी के कर्मचारियों और रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

केस डायरी में शिकायतकर्ता एवं कोचिंग संचालक राजेश प्रसाद के बयान का भी उल्लेख है। उनके अनुसार, धनबाद के बलियापुर स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से पहले मोबाइल के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई थी।

⚖️ जमानत याचिका का CID ने किया विरोध

मुख्य आरोपी दीपक कुमार की जमानत याचिका का CID ने विरोध किया है। जांच एजेंसी ने अदालत में बैंक लेन-देन, मोबाइल CDR और कथित परीक्षा सेटिंग से जुड़े साक्ष्यों का हवाला दिया है।

फिलहाल CID पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। आगे की न्यायिक कार्यवाही और जांच के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

About Author

error: Content is protected !!