एनजीटी के आदेश की खुलेआम धज्जियाँ, पूर्वी टुंडी में पुलिस संरक्षण में चल रहा अवैध बालू कारोबार

पूर्वी टुंडी/धनबाद:
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद पूर्वी टुंडी क्षेत्र में अवैध बालू खनन और परिवहन का खेल बेरोकटोक जारी है। पड़ुआ-बेजरा बराकर नदी घाट और निरसा के सिजुआ बराकर नदी घाट इस अवैध कारोबार के मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जहां दिन-रात नियमों को ताक पर रखकर बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह तड़के से ही दर्जनों ट्रैक्टर और नावों के माध्यम से नदी से बालू निकाला जाता है और फिर उसे हाइवा वाहनों के जरिए विभिन्न इलाकों में भेजा जाता है। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा है, जिसमें नदी घाट से लेकर मुख्य सड़कों तक एक तय रूट तैयार किया गया है।

बताया जा रहा है कि शंकरडीह मोड़ के रास्ते यह अवैध बालू गोविंदपुर होते हुए जिले के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा रहा है। शाम होते ही इस रूट पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरी रात ट्रकों की आवाजाही से क्षेत्र गूंजता रहता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध कारोबार के कारण उनकी जिंदगी प्रभावित हो गई है। रातभर हाइवा वाहनों की आवाजाही से नींद पूरी नहीं हो पाती, वहीं धूल और सड़क पर गिरा बालू दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।
ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब भी वे इस अवैध कारोबार का विरोध करते हैं, तो उन्हें पुलिस के नाम पर धमकियां दी जाती हैं। यहां तक कि झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की चेतावनी भी दी जाती है, जिससे लोग डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, नदी घाट से लेकर मुख्य सड़क तक दोनों किनारों पर लगातार बालू का ढेर जमा रहता है। इसके कारण दोपहिया वाहन फिसलकर रोजाना दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कई लोग घायल भी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रशासन और विभागों की भूमिका पर सवाल
ग्रामीणों ने खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा कारोबार संरक्षण में फल-फूल रहा है और इसमें बड़े स्तर पर आर्थिक लेन-देन की आशंका जताई जा रही है, और आरोप लगाया कि अवैध बालू कारोबार पुलिस संरक्षण में चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पिछले 10 वर्षों में यहां तैनात रहे थानेदारों और संबंधित अधिकारियों की संपत्ति की जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध बालू खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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