बोकारो में इंसाफ का गला घोंटने का आरोप, पिंड्राजोरा थाना के 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड
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18 साल की लड़की की हत्या मामले में बड़ा एक्शन, पूरे थाना के 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड

झारखंड के बोकारो से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 18 वर्षीय युवती की हत्या के मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पुलिस ने न सिर्फ आरोपी को बचाने की कोशिश की, बल्कि पीड़ित परिवार के साथ मारपीट तक की। मामले में हाई कोर्ट की सख्ती के बाद पूरे थाना के 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

यह मामला बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र का है। ग्राम खूंटाडीह निवासी रेखा देवी ने 24 जुलाई 2025 को अपनी 18 वर्षीय बेटी पुष्पा के अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के लिए थाना का दरवाजा खटखटाया।
हालांकि, पुलिस ने इस मामले में 10 दिन बाद 4 अगस्त 2025 को एफआईआर दर्ज की। इसके बाद करीब 8 महीने तक जांच चलती रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
थक-हार कर पीड़ित परिवार ने हाई कोर्ट का रुख किया। मार्च 2025 में अदालत ने बोकारो एसपी को तलब कर मामले में देरी और लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और सीबीआई जांच की चेतावनी दी।
इसी दौरान आरोप है कि पुलिस ने जांच के बजाय पीड़ित परिवार के ही एक सदस्य को उठाकर उसकी पिटाई कर दी। इस पर हाई कोर्ट ने और सख्त रुख अपनाते हुए झारखंड के डीजीपी और एसपी को फटकार लगाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी हरविंदर सिंह ने सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। SIT ने महज एक दिन में पूरे मामले का खुलासा कर दिया।
जांच में सामने आया कि खूंटाडीह निवासी 26 वर्षीय दिनेश महतो का पुष्पा के साथ प्रेम संबंध था। शादी के दबाव से बचने के लिए उसने 21 जुलाई 2025 को चास कॉलेज के पास ले जाकर चाकू से हत्या कर दी और शव को जमीन में दफना दिया।
पुलिस ने खुदाई कर पुष्पा के अवशेष, कपड़े के टुकड़े, रबर बैंड और हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू बरामद किया।
जांच में यह भी सामने आया कि थाना स्तर पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ। आरोप है कि पुलिसकर्मी आरोपी पक्ष के साथ मिलकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे थे और पीड़ित परिवार को प्रताड़ित कर रहे थे।
मामले की सच्चाई सामने आने के बाद एसपी हरविंदर सिंह ने बड़ा एक्शन लेते हुए पिंड्राजोरा थाना के प्रभारी समेत कुल 28 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।
यह मामला न सिर्फ एक जघन्य हत्या का है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस पुलिस पर न्याय दिलाने की जिम्मेदारी होती है, उसी पर जब अन्याय के आरोप लगें, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंताजनक है।