बेलगड़िया पुनर्वास में बड़ा संकट: कागज पर सरकारी हुई जमीन, 15 हजार परिवारों का भविष्य अधर में
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!धनबाद: बेलगड़िया पुनर्वास परियोजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। झरिया के अग्नि प्रभावित इलाकों से विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए अधिग्रहित की गई जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने हजारों परिवारों की उम्मीदों पर संकट खड़ा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, बीसीसीएल द्वारा लगभग 378.39 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस जमीन पर 18 हजार से अधिक आवास बनाए जाने की योजना है, जिनमें से बड़ी संख्या में मकान तैयार भी हो चुके हैं। लेकिन हाल ही में हुए नए सर्वे में इस जमीन को “गैर आबाद” यानी सरकारी दर्ज कर दिया गया है।
इस बदलाव ने जमीन के स्वामित्व को लेकर गंभीर उलझन पैदा कर दी है। पुराने सर्वे के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जबकि नए सर्वे में उसकी प्रकृति बदल दी गई है। इस विरोधाभास के कारण म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।
इतना ही नहीं, जमीन को एनजीडीआरएस की प्रतिबंधित सूची में डाल दिए जाने के कारण अब उसका रजिस्ट्रेशन भी संभव नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें इस परियोजना के तहत बसाया जाना है।
करीब 15 हजार से अधिक परिवार इस विवाद के कारण अनिश्चितता की स्थिति में हैं। जिन लोगों को सुरक्षित आवास और बेहतर जीवन का भरोसा दिया गया था, आज वही अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
इस मामले में संबंधित अधिकारी मुरारी नायक ने भी स्वीकार किया है कि पुराने और नए रिकॉर्ड में अंतर है, जिसे दूर किए बिना आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है।
वहीं, जानकारों का मानना है कि अब इस जटिल विवाद का समाधान केवल सिविल कोर्ट के माध्यम से ही संभव है, जिससे पुनर्वास प्रक्रिया में और देरी होने की आशंका है।
करीब 5940 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य अब अधर में लटकता नजर आ रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो 2028 तक पुनर्वास का लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किसकी है… और आखिरकार इन हजारों परिवारों को उनका हक कब मिलेगा?