पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा आज भी जीवित — माँ काली की विशेष कृपा टुंडी के दुर्गाडीह में
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धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत दुर्गाडीह में पीढ़ियों से चली आ रही माँ काली पूजा की परंपरा आज भी जीवित है। टुंडी के राजा के समय से प्रारंभ हुई यह पूजा आज भी पूरी आस्था और परंपरा के साथ मनाई जा रही है।

धनबाद का टुंडी क्षेत्र भले ही आज भी शिक्षा, रोजगार और पारंपरिक स्वरोजगार के मामले में पिछड़ा माना जाता हो, लेकिन यहाँ की धार्मिक परंपराएँ लोगों की आस्था और एकजुटता का अद्भुत उदाहरण पेश करती हैं।
बाउरी समाज के लोगों के अथक प्रयास से हर वर्ष माँ काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। यह परंपरा टुंडी के राजा के समय से चली आ रही है और अब तक तीन पीढ़ियाँ इस पूजा को निभाती आ रही हैं।
पूजा समिति के अध्यक्ष राजू बाउरी ने बताया कि यह काली पूजा हमारी तीन पीढ़ियों से निरंतर जारी है। वहीं समाजसेवी रंजीत बाउरी ने कहा कि यह पर्व सनातन धर्म के प्रति आस्था को और मजबूत करने का कार्य करता है।
आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में सभी समुदायों का सहयोग इस परंपरा को जीवित रखने में निरंतर मिलता रहा है। सदियों से यह क्षेत्र पिछड़ा रहा है, लेकिन लोगों की भक्ति और परंपरा के प्रति निष्ठा ने इस पूजा को आज भी जीवंत बनाए रखा है।