कानून के रखवाले ही उड़ा रहे कानून की धज्जियां: जर्जर पुलिस गाड़ियों से हो रही गश्ती, बिना नंबर प्लेट वाहन आम बात!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!धनबाद/बाघमारा:
सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा जिनके कंधों पर है, उनके संसाधन खुद बदहाल हैं। बाघमारा और कतरास क्षेत्र में पुलिसिंग की हकीकत किसी से छिपी नहीं है — अंग्रेजों के जमाने की जर्जर पुलिस गाड़ियाँ आज भी कानून व्यवस्था संभालने की कोशिश कर रही हैं। न इनमें ब्रेक सही से काम करता है, न लाइट जलती है और न ही नंबर प्लेट मौजूद है। कुछ गाड़ियाँ तो ऐसी हैं जो कभी भी बीच सड़क पर दम तोड़ सकती हैं।
पुलिसकर्मी जान जोखिम में डालकर रोज़ इन खस्ताहाल वाहनों से गश्ती कर रहे हैं। ऐसे में न अपराधी डरते हैं, न जनता को सुरक्षा का एहसास होता है। वहीं, दूसरी ओर आम जनता पर ट्रैफिक नियमों को लेकर कड़ी कार्रवाई की जा रही है — बिना हेलमेट, कागजात की कमी, काली फिल्म, या सीट बेल्ट न लगाने पर मोटा जुर्माना लगाया जा रहा है।
दोहरे मापदंडों पर सवाल खड़े
क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?
क्या सरकारी गाड़ियों पर नियम लागू नहीं होते?
किसकी जिम्मेदारी है इन जर्जर पुलिस वाहनों की मरम्मत और सुरक्षा?
धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार के निर्देशों पर अवैध कारोबार पर तो नकेल कसी गई है, लेकिन पुलिस विभाग के जमीनी संसाधनों की हालत खुद एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। लगभग 20-25 साल पुरानी तकनीकी रूप से अनुपयुक्त गाड़ियाँ पुलिसिंग का आधार बनी हुई हैं।
थानों में संसाधन गायब
सूत्रों के मुताबिक कई थानों और ओपी में तो गाड़ी ही नहीं है, जिससे आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया बेहद धीमी हो जाती है। यह सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा है।—
“फोटो झूठ नहीं बोलता” — जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वह साफ दर्शाती हैं कि कैसे नियमों की अनदेखी कर प्रशासन खुद सवालों के घेरे में है।
जनता की आवाज़:
“हमें हेलमेट और कागजात के लिए रोका जाता है, लेकिन पुलिस खुद बिना नंबर वाली गाड़ी से चलती है। ये कैसा कानून है?” — एक स्थानीय नागरिक—
Prime News 24 की मांग:
जर्जर पुलिस वाहनों की तत्काल जांच और नवीनीकरण
थानों को आधुनिक गाड़ियों से लैस किया जाए
नियमों की पालना सरकारी विभागों पर भी समान रूप से लागू हो