हजारीबाग का DTO ऑफिस खूब चर्चे में है। वजह भी चौंकाने वाली है, यहां एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो अलग-अलग गाड़ियों का पंजीकरण किया गया, जिनका इंजन और चेसिस नंबर भी एक ही था। जब मामले की जांच हुई तो जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। जांच से खुलासा हुआ कि हजारीबाग में रजिस्ट्रेशन कराई गई सेकंड हैंड स्कॉर्पियो गाड़ी असल में चोरी की थी। इस गाड़ी की असली पहचान बिहार के पूर्णिया से मिली, जहां यह वाहन 2022 में चोरी हुआ था। इसका असली रजिस्ट्रेशन नंबर BR 11 PA 8427 था। जांच से यह भी तथ्य सामने आया कि यह स्कॉर्पियो पहले कई बार बिक चुकी थी और इसका अंतिम मालिक वैशाली का अमरजीत कुमार था। महिंद्रा शोरूम के सर्विस रिकॉर्ड के अनुसार, 2022 तक इस गाड़ी की अंतिम सर्विस हुई थी। अब इस बात पर गहराई से जांच-पड़ताल की जा रही है कि चोरी की गाड़ी को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हजारीबाग परिवहन कार्यालय से कैसे रजिस्टर किया गया?
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अबतक की जांच में जो बातें सामने आई है, उसके अनुसार गाड़ी को फर्जी कागजात के आधार पर सत्येंद्रनाथ सिंह की गाड़ी दिखाकर सचिन दास के नाम ट्रांसफर किया गया था। इस पूरे खेल में हजारीबाग DTO ऑफिस के ही एक सहायक की भूमिका सामने आई। जिन्होंने बिना असली मालिक को बुलाये रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी थी। जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि रांची के एक शख्स ने इस गाड़ी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे बेचने का काम किया था।