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कभी रिमझिम, तो कभी झमाझम बारिश ने बोकारो की रफ्तार की सुस्त
मौसम का यू-टर्न बंगाल की खाड़ी में निम्न दवाब के कारण हो रही बारिश, जलजमाव से लोगों को हुई परेशान
बोकारो, दक्षिणी-पश्चिमी माॅनसून की राजस्थान से वापसी शुरू हो गयी है. इस कारण बंगाल की खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया बन रहा है, असर बोकारो के मौसम पर भी देखने को मिल रहा है. मंगलवार से बारिश का जो दौर शुरू हुआ वह बुधवार को भी जारी रहा. कभी रिमझिम बारिश की फुहार, तो कभी झमाझम बारिश से चास-बोकारो समेत ग्रामीण क्षेत्राें पर जनजीवन प्रभावित हो गया. शहर की रफ्तार को धीमा कर दिया. कभी-कभी बारिश रूक भी जाती, तो भी आसमान पर छाये बादल ने शहर को पूरी तरह खुलने का मौका नहीं दिया. बारिश का असर शहर के विभिन्न सेक्टरों में देखने को मिला. सेक्टर के निचले इलाका में जलजमाव की स्थिति देखी गयी. नया मोड़ से सीजेड गेट होकर रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क से आवागमन प्रभावित हुआ. टूटी सड़क में पानी जमने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. लकड़ीगोला (उकरीद मोड़) के पास बोकारो-रामगढ़ नेशनल हाइवे पर बारिश की पानी ही पानी हो गया. चास नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न मोहल्ले में लगातार बारिश के कारण स्थिति खराब दिखी.
बाजार पर दिखा असर
पितृपक्ष के कारण पहले से ही सुस्त चल रही बाजार पर बारिश की बूंद मंदी की तरह गिरी. मंगलवार शाम को हुई बारिश के कारण बाजार में चहल-पहल गायब थी. बुधवार को दुकान, तो खुली लेकिन, ग्राहक नदारद रहें. हालांकि दोपहर में बारिश का दौर थमा. लेकिन, तब तक बाजार की किस्मत में मंदी लिखी जा चुकी थी. दिन भर रूक-रूक कर हो रही बारिश ने बाजार को सुचारू रूप से चलने का मौका नहीं दिया.
चास में सड़कों पर जलजमाव, जनजीवन अस्त-व्यस्त
चास, बारिश से चास नगर निगम व आसपास के क्षेत्र में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया. सोलागीडीह, रामनगर कॉलोनी , कृष्णा नगर सहित विभिन्न कॉलोनी की सड़कों पर जलजमाव हो गया है. इस कारण स्कूली बच्चों सहित अन्य लोगों को आवागमन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लोगों ने कहा कि जब भी बारिश होती है, सड़कों पर पानी भर जाता है और सभी को बहुत परेशानी होती है. नगर निगम प्रशासन को सभी जर्जर सड़क की पुनः निर्माण या मरम्मत करानी चाहिए. बारिश की वजह से बाजार में दुकान भी देर से खुली, इसलिए जितिया पर्व के लिए लोगों को विभिन्न सामग्री की खरीदारी करने में भी परेशानी हुई. वहीं बारिश से चास के कई तालाब लबालब भर गये हैं.