टुंडी में दर्दनाक हादसा: कार की टक्कर से चितल हिरण की मौत, इलाज के अभाव में तड़पता रहा बेजुबान

टुंडी में दर्दनाक हादसा: कार की टक्कर से चितल हिरण की मौत, इलाज के अभाव में तड़पता रहा बेजुबान

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पशु चिकित्सालय में डॉक्टर नहीं, व्यवस्था फेल — ग्रामीणों में आक्रोश, वन विभाग ने वाहन जब्त किया

धनबाद के टुंडी प्रखंड से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां इंसानी लापरवाही और सिस्टम की नाकामी के कारण एक बेजुबान चितल हिरण की दर्दनाक मौत हो गई।


11 अप्रैल 2026 को भूरसाबांक यज्ञ स्थल और अलकुसिया जोरिया के बीच एक तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने सड़क पार कर रहे दो चितल हिरणों में से एक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि हिरण गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर ही तड़पता रहा।
घटना के बाद वाहन का चक्का जाम हो गया, जिससे चालक मौके से भाग नहीं सका। वाहन में चार लोग सवार थे। हादसे की आवाज सुनकर पास के मंदिर से पुजारी और श्रद्धालु मौके पर पहुंचे और धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए घायल हिरण को पशु चिकित्सालय पहुंचाया, लेकिन वहां न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही इलाज की कोई व्यवस्था। इलाज के अभाव में हिरण ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि टुंडी में न केवल पशु चिकित्सालय बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे इंसानों और जानवरों दोनों की जान खतरे में रहती है।
सूचना मिलने पर वन विभाग के सहायक वन संरक्षक अजय कुमार मंजुल मौके पर पहुंचे और वाहन को जब्त कर लिया। मृत हिरण को कुसमाटांड़ नर्सरी परिसर में दफनाया गया।
वन विभाग के अनुसार, यदि जांच में वाहन चालक की लापरवाही से हिरण की मौत साबित होती है, तो उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज कर 3 से 7 साल तक की सजा और 25 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
फिलहाल वाहन में सवार चारों लोगों की पहचान नहीं हो पाई है और मामले की जांच जारी है।

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