माघ मेले में कथित पुलिस दुर्व्यवहार का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, शंकराचार्य के शिष्यों से जुड़ा है विवाद
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रयागराज/नई दिल्ली :
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और नाबालिग वेदपाठी बटुकों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में अधिवक्ता उज्ज्वल गौर ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है।
याचिका में माघ मेले के दौरान पुलिस की कार्रवाई को क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक बताया गया है, साथ ही धार्मिक पदाधिकारियों और संतों के साथ व्यवहार को लेकर स्पष्ट SOP (Standard Operating Procedure) बनाने की मांग की गई है।
दरअसल, माघ मेले के सबसे पवित्र स्नान पर्व मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। उनके साथ कई नाबालिग ब्रह्मचारी, वेदपाठी बटुक (उम्र 11 से 14 वर्ष) और संत मौजूद थे।
याचिका के अनुसार, इसी दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बच्चों और संतों के साथ घसीटने, मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं।
घटना से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिन्हें याचिका का आधार बनाया गया है। इन वीडियो में पुलिस की कार्रवाई को मानवीय गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया है।
PIL में यह भी कहा गया है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस के अनियंत्रित विवेकाधिकार और धार्मिक व्यक्तियों से निपटने के लिए ठोस दिशा-निर्देशों की कमी को उजागर करती हैं।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अहम मानी जा रही है।