धनबाद के युवा लेखक सुभम कुमार रवानी: रिश्तों को शब्दों में पिरोने वाला एक “दृश्य लेखक”
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सुभम कुमार रवानी एक भारतीय लेखक और कवि हैं। उनका जन्म 18 मई 2003 को डोमनपुर, राजगंज, धनबाद (झारखंड) में हुआ। उनके पिता प्रहलाद रवानी पेशे से एक टेलर मास्टर हैं, जबकि उनकी माता शर्मिला देवी गृहिणी हैं। उनके परिवार में एक छोटे भाई कुणाल कुमार रवानी और एक बड़ी बहन नेहा कुमारी हैं।
सुभम कुमार रवानी की साहित्यिक यात्रा की शुरुआत पुस्तक लेखन से हुई। उनकी पहली पुस्तक “नेहा दीदी का लाडला” का प्रकाशन 4 मार्च 2022 को हुआ। यह पुस्तक भाई-बहन के पवित्र और भावनात्मक रिश्ते पर आधारित है, जिसमें उन्होंने इस रिश्ते के महत्व, प्रेम और अपनत्व को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।
उनकी दूसरी पुस्तक “रिश्तों की ज़िम्मेदारियाँ” का प्रकाशन 22 जुलाई 2024 को हुआ। यह पुस्तक सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए है और इसमें विभिन्न प्रकार के रिश्तों में निहित जिम्मेदारियों, भावनात्मक बंधनों और सामाजिक मूल्यों को दर्शाया गया है।
इसके अतिरिक्त, सुभम कुमार रवानी की कविताएँ और रचनाएँ अन्य पुस्तकों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ब्लू क्लाउड पब्लिकेशन द्वारा आयोजित “नेचुरल ऑथर अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।
कई वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय सुभम कुमार रवानी ने कविता, कहानी और गद्य जैसी विभिन्न विधाओं में प्रयोग किए हैं। उनकी शुरुआती रचनाओं में कविता और कहानियाँ प्रमुख रही हैं, जिनमें से कुछ आत्मकथात्मक भी हैं।
सुभम कुमार रवानी स्वयं को एक “दृश्य लेखक” मानते हैं। कविता और कहानी लिखते समय वे पहले पूरी रचना को एक दृश्य के रूप में कल्पना करते हैं और फिर उसे शब्दों में ढालते हैं। हालांकि, नोट्स या यात्रा वृत्तांत लिखते समय वे किसी पूर्व योजना पर निर्भर नहीं रहते, क्योंकि उनके अनुसार अप्रत्याशित अनुभव ही लेखन को अधिक रोमांचक और जीवंत बनाते हैं।