धनबाद के जालान अस्पताल में मानवता शर्मसार, गर्भवती महिला की मौत के बाद हंगामा
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इलाज में लापरवाही और ₹50 हजार अवैध वसूली का आरोप
परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल परिसर बना रणक्षेत्र

धनबाद के एशियन जालान अस्पताल में गर्भवती महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतका की पहचान सरायढेला निवासी किरण देवी के रूप में हुई है, जिन्हें करीब एक सप्ताह पहले प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को बच्चे के जन्म से पहले ही महिला की मौत हो गई, जिसके बाद परिजन आक्रोशित हो उठे।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही, मरीज की वास्तविक हालत छिपाने और ₹50,000 की अवैध वसूली का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
ऑपरेशन से इनकार, नॉर्मल डिलीवरी का दबाव
परिजनों का कहना है कि शुरुआत में डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई थी, लेकिन बाद में महिला का पेट “सेंसलेस” होने का हवाला देकर ऑपरेशन से इनकार कर दिया गया और जबरन नॉर्मल डिलीवरी का प्रयास किया गया।
36 घंटे तक इलाज में टालमटोल का आरोप
आरोप है कि महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन करीब 36 घंटे तक इलाज को टालते रहे। इस दौरान किसी सीनियर डॉक्टर को भी नहीं बुलाया गया। जब डिस्चार्ज की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी अचानक मरीज की हालत गंभीर बताकर उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
₹50 हजार जमा कराने का दबाव
सबसे गंभीर आरोप यह है कि मरीज की हालत नाजुक होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से ₹50,000 जमा करने का दबाव बनाया गया। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
घटना की सूचना पर धनबाद के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह अस्पताल चैरिटी के उद्देश्य से बना था, लेकिन यहां गरीब मरीजों से पैसे के लिए दबाव बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रबंधन से बात करने का आश्वासन दिया।
पुलिस तैनात, स्थिति नियंत्रण में
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास किया गया।
अब सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
क्या समय पर इलाज मिलता तो एक मां की जान बच सकती थी?
क्या निजी अस्पतालों में इलाज से ज्यादा वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है?
इस मौत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?