खुलेआम बिक रही प्रतिबंधित लॉटरी, जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
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झरिया (धनबाद)।
झरिया कोयलांचल में प्रतिबंधित लॉटरी का अवैध कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक लॉटरी माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस अवैध लॉटरी नेटवर्क का कथित सरगना बिहार से फरार वारंटी पवन झुनझुनवाला बताया जा रहा है। वहीं उसके सहयोगियों के रूप में झरिया क्षेत्र से समीर, जोड़ापोखर-जामाडोबा निवासी तनवीर तथा पाथरडीह से एक मैनेजकर्ता कुमार का नाम क्षेत्र में चर्चा में है। ये लोग लॉटरी खपाने से लेकर पूरे नेटवर्क के प्रबंधन तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में खुलेआम लॉटरी की बिक्री हो रही है, लेकिन न तो पुलिस और न ही प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है। मीडिया द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित किए जाने और जन आक्रोश बढ़ने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी चिंता का विषय बनती जा रही है।
गरीबों की मेहनत की कमाई पर डाका
अवैध लॉटरी का यह खेल सीधे तौर पर गरीब और मजदूर तबके की मेहनत की कमाई को लूट रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए, लेकिन इसके बावजूद लॉटरी का कारोबार बदस्तूर जारी है। इससे समाज में अपराध, धोखाधड़ी और भ्रम का माहौल तेजी से बढ़ रहा है।
मीडिया की भूमिका, प्रशासन मौन
अखबारों और डिजिटल मीडिया में लॉटरी से जुड़े मामलों की खबरें बार-बार सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई न होना प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक चिंतकों ने इस स्थिति को लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि यदि यह अवैध लॉटरी प्रशासन की जानकारी में चल रही है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत का संकेत भी हो सकता है।
जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा?
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ एक अवैध कारोबार की अनदेखी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने वाली बड़ी चूक साबित हो सकती है