पत्रकार की गिरफ्तारी नहीं, लोकतंत्र की हत्या है!
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रांची पुलिस ने बिना किसी वारंट और बिना दर्ज किसी मामले के वरिष्ठ पत्रकार तीर्थनाथ आकाश को गिरफ्तार किया है। यह सिर्फ़ एक पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है।
तीर्थनाथ आकाश ने लगातार सूर्या हांसदा के फ़र्ज़ी एनकाउंटर और रिम्स-2 परियोजना में आदिवासी ज़मीन की अवैध लूट जैसी संवेदनशील खबरें उजागर की हैं। इनके माध्यम से उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और प्रशासन की जवाबदेही की मांग को उजागर किया।
यह कार्रवाई सत्य को दबाने की, लोकतंत्र को कमजोर करने की और आदिवासी अस्मिता को चोट पहुँचाने की कोशिश है।
इस गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि राज्य सरकार सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है और प्रेस की स्वतंत्रता को चुनौती दे रही है।
यह हम सभी के लिए खतरे की घंटी है:
यह #लोकतंत्र पर हमला है।
यह संविधान पर हमला है।
यह आदिवासी अस्मिता पर हमला है।
यह JournalismUnderAttack है।
हम पत्रकारिता के इस स्वतंत्र प्रहरी तीर्थनाथ आकाश के समर्थन में खड़े हैं और सरकार से मांग करते हैं कि तुरंत उन्हें रिहा किया जाए और प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।