झारखंड आंदोलन के प्रणेता ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन नहीं रहे, राज्यभर में शोक की लहर
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!झारखंड की आत्मा आज शोक में डूबी है।
राज्य निर्माण के महानायक, आदिवासी समाज की आवाज, और झारखंड आंदोलन के स्तंभ, ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन का आज दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे।
शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं, एक आंदोलन थे। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। उनका जीवन आदिवासी समाज के हक और सम्मान की लड़ाई के लिए समर्पित रहा।
वे उस पीढ़ी के नेता थे, जिन्होंने जंगल, जमीन और जन का अर्थ सिर्फ समझा नहीं, उसके लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंत में झारखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिलवाया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरे दुख के साथ कहा:
“मेरे पिता, मेरे मार्गदर्शक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक अब हमारे बीच नहीं रहे। यह मेरे लिए ही नहीं, पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।”
उनके निधन से न केवल झारखंड, बल्कि संपूर्ण भारत में शोक की लहर है।
राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई जिलों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं, और राज्य सरकार द्वारा राजकीय शोक की घोषणा की जा सकती है।
शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आदर्श, उनका संघर्ष और उनका सपना – हमेशा जीवित रहेगा।