“हेलमेट पहनो, नहीं तो थाने में घंटों बैठो!”
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!– जामताड़ा पुलिस की अनोखी जागरूकता मुहिम पर खास रिपोर्ट
जामताड़ा (झारखंड)। सड़क पर तेज रफ्तार से बाइक भगाना भले ही आपको आज़ादी का एहसास कराए, लेकिन घर सुरक्षित लौटने का हक़ आपके परिवार का भी है। यही सोच लेकर जामताड़ा पुलिस ने हाल ही में एक अनोखी पहल की – जिसमें डंडे और चालान की जगह समझाने और सिखाने पर जोर दिया गया।
🚦 सड़क पर सुरक्षा की कहानी और ‘थाने की पाठशाला’
जामताड़ा जिले में आए दिन सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अख़बार की सुर्खियों में रहती हैं। इसी चिंता के साथ पुलिस अधीक्षक राज कुमार मेहता के नेतृत्व में 1 जुलाई से 15 जुलाई तक जिलेभर में हेलमेट जागरूकता अभियान चलाया गया।
इस दौरान जो दोपहिया चालक बिना हेलमेट पकड़े गए, उन्हें तुरंत चालान करने या जुर्माना भरवाने के बजाय थाने की पाठशाला में बैठा दिया गया। घंटों तक उन्हें सड़क सुरक्षा पर ‘ट्यूशन’ दी गई—
शर्त साफ थी:
> “अब हेलमेट पहनोगे तो ही छोड़ेंगे!”
पुलिस ने इस पहल से लोगों के मन में कानून का डर नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी का भाव जगाने की कोशिश की।
👨👩👧👦 जब हेलमेट ‘बोझ’ और कानून ‘झंझट’ बन जाए…
अभियान के दिनों में सड़कों पर हेलमेट पहनने वालों की संख्या बढ़ी भी। पर जैसे ही 15 जुलाई की समयसीमा पूरी हुई, जामताड़ा की गलियों और सड़कों पर फिर वही पुराना मंजर लौट आया—
बिना हेलमेट के युवा, अभिभावक, लड़कियाँ और लड़के… फिल्मी अंदाज़ में बाइक और स्कूटी दौड़ाते हुए।
✨ एक संवेदनशील संदेश
इस अभियान के पीछे वही भाव था जो हर पिता के मन में होता है—
> “सड़क पर फर्राटे से गाड़ी भगाने का हक़ तुम्हारा है,
लेकिन घर सुरक्षित लौटने का हक़ तुम्हारे परिवार का है।”
जामताड़ा पुलिस की पहल एक याद दिलाती है कि हेलमेट बोझ नहीं, सुरक्षा की ढाल है।
अभियान खत्म हो गया, लेकिन सबक अभी भी ज़िंदा रहना चाहिए—
“हेलमेट पहनिए, वरना अगली बार थाने की
पाठशाला के लिए तैयार रहिए!” 🚨🪖