सिजुआ बांसजोड़ा में चार साल पुरानी आग बनी खतरा: घरों तक पहुंची गैस, ग्रामीणों में उबाल

सिजुआ बांसजोड़ा में चार साल पुरानी आग बनी खतरा: घरों तक पहुंची गैस, ग्रामीणों में उबाल

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धनबाद | Prime News 24
सिजुआ क्षेत्र के बांसजोड़ा 12 नंबर की चार साल पुरानी कोयले की आग अब स्थानीय लोगों की ज़िंदगियों के लिए जानलेवा बन चुकी है। शनिवार सुबह संतोष भुइयां के घर के आंगन में ज़मीन धंसने से लगभग 10 फीट गहरा गोफ बन गया, जिससे गैस का तेज़ रिसाव हो रहा है। सुबह 6 बजे की यह घटना उस वक्त हुई जब परिवार गहरी नींद में था।

घर में बना गोफ, गैस की दुर्गंध से मचा हड़कंप

संतोष भुइयां ही नहीं, उनके पड़ोसी शशि और अशोक भुइयां के घरों में भी दीवारों में गहरी दरारें पड़ गई हैं। आसपास की ज़मीन से तपिश महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आग अब ज़मीन के नीचे नहीं, उनके घरों तक पहुंच चुकी है।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, पुनर्वास की कर रहे मांग

घटना के बाद ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गोफ भरने से इंकार कर दिया। उनका आरोप है कि “हर बार मिट्टी डालकर खानापूर्ति की जाती है, जबकि खतरा जस का तस बना रहता है।” ग्रामीणों का कहना है कि “रोज घुट-घुट कर मरने से अच्छा है कि एक ही दिन मौत आ जाए।”

20 से अधिक घर प्रभावित, गैस से आंखों में जलन और दम घुटने की शिकायत

पप्पू मंडल, धर्मेंद्र रजक, गायत्री देवी, पार्वती देवी, चंदू भुइयां, लखन रविदास जैसे लगभग 20 से अधिक परिवार गैस और धुंए से प्रभावित हैं। करीब 200 मीटर तक गैस का असर महसूस किया जा रहा है। लोगों को आंखों में जलन, उल्टी, खांसी और दमा जैसी शिकायतें हो रही हैं।

“अगर जान गई तो दर्ज होगा हत्या का केस” — ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर किसी की जान गई, तो वे प्रबंधन के खिलाफ नामजद हत्या का मुकदमा दर्ज कराएंगे। उनका आरोप है कि कंपनी सिर्फ बोर्ड लगाकर और कागजों में पुनर्वास दिखाकर लोगों को मरने के लिए छोड़ रही है।

खतरे में भविष्य: तीन स्कूल सीधे प्रभावित

घटना स्थल से महज़ 10 फीट की दूरी पर एक सरकारी विद्यालय और दो बीसीसीएल संचालित स्कूल चल रहे हैं। करीब 230 बच्चे रोज़ इन्हीं जहरीली हवाओं में पढ़ने आते हैं। सर्वोदय शिशु विद्यालय के कमरे में तो एलपीजी जैसी गंध महसूस की जाती है।

प्रबंधन का पक्ष: “दो बार कोशिश की गई, ग्रामीणों ने रोका”

बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि गोफ की जानकारी मिलते ही मशीन और मिट्टी लेकर मौके पर पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों ने भराई नहीं करने दी। दूसरी ओर स्टेट ऑफिसर बी.बी. सिंह ने कहा कि पुनर्वास की फाइल मुख्यालय भेजी गई है, जो पहले रिजेक्ट हो चुकी थी। अब केंदुआटांड़ के पास 70 परिवारों के पुनर्वास की योजना है।

🛑 Prime News 24 की अपील:
प्रशासन और प्रबंधन से निवेदन है कि इस मामले को गंभीरता से लें। लोगों की ज़िंदगियों के साथ समझौता न करें और पुनर्वास प्रक्रिया को तेज़ किया जाए।

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