धनबाद के दामाद रामबाबू सिंह पाकिस्तानी हमले में हुए शहीद, 

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ससुर ने मीडिया से कहा- जब युद्धविराम हो गया, फिर मेरा दामाद कैसे हो गया शहीद ?

महज पांच महीने पहले हुई थी शादी, पत्नी है गर्भवती

धनबाद: जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन हमले में धनबाद के दामाद और भारतीय सेना के जवान रामबाबू सिंह (28 वर्ष) शहीद हो गए। रामबाबू की शादी महज पांच महीने पहले 14 दिसंबर 2024 को धनबाद की अंजलि के साथ हुई थी, और उनकी पत्नी गर्भवती हैं। इस दुखद घटना ने पूरे परिवार और समुदाय को सदमे में डाल दिया है।

परिवार में मातम, ससुर ने उठाए सवाल

रामबाबू के ससुर सुभाष शर्मा, जिनकी डिगवाडीह में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के समीप शराब दुकान है, ने मीडिया को बताया, “जब युद्धविराम हो गया था, तो मेरा दामाद कैसे शहीद हो गया? यह समझ से परे है।” उन्होंने बताया कि रामबाबू ने 12 मई को सुबह साढ़े 10 बजे अपनी पत्नी अंजलि से आखिरी बार बात की थी। उस समय रामबाबू ने कहा था कि वह ठीक हैं और जल्द ही घर लौटने की उम्मीद है। लेकिन दोपहर 3 बजे उनके शहीद होने की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही सुभाष अपनी पुत्री को लेकर रामबाबू के सीवान स्थित घर पहुंच गए हैं.

रामबाबू और अंजलि की कहानी

रामबाबू मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के वसिलपुर गांव के रहने वाले थे। उनकी शादी धनबाद की अंजलि से हुई थी, जो एयर इंडिया में कार्यरत हैं। अंजलि ने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई डीएवी बनियाहीर से पूरी की थी। आगे की पढाई SSLNT कॉलेज व दिल्ली से पूरी की. वर्ष 2021 में अंजलि को एयर इंडिया में नौकरी मिल गयी. होली के बाद रामबाबू और अंजलि सीवान से डिगवाडीह आए थे, जहां से रामबाबू अपनी ड्यूटी पर जम्मू-कश्मीर लौटे थे। अंजलि के पिता ने बताया कि दोनों की जोड़ी को देखकर हर कोई खुश होता था, लेकिन अब यह खुशी मातम में बदल गई है।

घटना की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव बढ़ा हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने 8 से 10 मई तक पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए. दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी इसी दौरान रामबाबू की शहादत की खबर आई।

शोक की लहर

रामबाबू की शहादत की खबर सुनते ही डिगवाडीह और सीवान में उनके परिवार और समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने उनके बलिदान को सलाम करते हुए कहा कि रामबाबू ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, जो हर हिंदुस्तानी के लिए गर्व की बात है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

हालांकि, इस घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक सेना या सरकार की ओर से नहीं की गई है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया है कि रामबाबू 9 मई को गोलीबारी में घायल हुए थे और 12 मई को अस्पताल में उनकी मृत्यु हुई, लेकिन, परिवार के अनुसार उनकी शहादत 12 मई को हुई।

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