जामताड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार..नए पैंतरों से अपराध का साम्राज्य फैला रहे साइबर ठग…

जामताड़ा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार..नए पैंतरों से अपराध का साम्राज्य फैला रहे साइबर ठग…

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जामताड़ा : जामताड़ा पुलिस को गुप्त सूचना के आधार पर एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नारायणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत महेशपुर के पास खरकोकुंडी गांव में महुआ के पेड़ के नीचे चल रहे साइबर अपराध अड्डे पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में तीन साइबर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

पुलिस टीम की कमान:
छापेमारी का नेतृत्व थाना प्रभारी सह अवर निरीक्षक मनोज कुमार महतो ने किया। उनके साथ सब-इंस्पेक्टर हीरालाल महतो, एएसआई स्टेनली हेम्ब्रम तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

गिरफ्तार आरोपी:
करन दान, उम्र 21 वर्ष, पिता – गौर दान, ग्राम – सोनबाद, थाना – जामताड़ा
फुरकान अंसारी, उम्र 27 वर्ष, पिता – उस्मान मियां, ग्राम – फिटकोरिया, थाना – करमाटांड़
सद्दाम अंसारी, उम्र 30 वर्ष, पिता – फारूक मियां, ग्राम – फिटकोरिया, थाना – करमाटांड़
(सभी जिला – जामताड़ा)
बरामद सामान:
मोबाइल फोन – 08
सिम कार्ड – 12
एटीएम कार्ड – 02
आधार कार्ड – 01
पैन कार्ड – 02
नकद राशि – ₹13,700
अपराध का तरीका (Modus Operandi):

आरोपी गूगल पर विभिन्न ई-कॉमर्स कंपनियों, ई-पेमेंट सेवाओं तथा उपभोक्ता वस्तु कंपनियों के फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालते थे। उपभोक्ताओं की कॉल आने पर वे तकनीकी सहायता के नाम पर Quick Support, AnyDesk जैसे मोबाइल शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड करवाते और फिर उनके बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी चुराकर ठगी करते थे।

प्रमुख कार्यक्षेत्र: बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात

मामला दर्ज:
जामताड़ा साइबर थाना कांड संख्या 30/25, दिनांक 17.04.2025 को दर्ज किया गया है। धारा 111(2)(b)/317(2)/317(5)/318(4)/319(2)/336(3)/338/340(2)/3(5) Β.Ν.5 2023 एवं 66(B)(C)(D) आईटी एक्ट के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर सभी आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है।

बड़ी चुनौती – सजा नहीं मिलने से बढ़ रहा अपराध का साम्राज्य:
हालांकि पुलिस द्वारा बिना रुके लगातार की जा रही छापेमारी एवं गिरफ्तारी सराहनीय है, लेकिन एक गंभीर प्रश्न अब भी खड़ा है – आखिर क्यों इन साइबर अपराधियों को अपराध के अनुरूप सजा नहीं मिल पा रही है?

इन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तो होती है, लेकिन अक्सर गैर-गंभीर धाराओं, नॉन-स्टांप मामलों में कानूनी कार्रवाई होने के कारण ये जल्द ही छूट जाते हैं। इसका नतीजा यह है कि ये अपराधी नई-नई तकनीक और पैंतरों के साथ अपराध के साम्राज्य को और विस्तारित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इस तरह के मामलों में त्वरित एवं कठोर सजा सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक साइबर अपराध की जड़ें और गहरी होती रहेंगी।

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