दिल्ली में आम आदमी पार्टी की करारी हार पर कुमार विश्वास ने तीखे तंज किए हैं. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की हार पर कहा कि उनकी पत्नी रिजल्ट देखने के बाद रो पड़ीं. कुमार विश्वास ने कहा कि वो इस परिणाम से खुश भी हैं और दुखी भी.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी करारी हार हुई है. भारतीय जनता पार्टी के खाते में 48 सीटें आती नजर आ रही हैं. इसमें से 32 सीटों पर पार्टी जीत हासिल कर चुकी है. वहीं, आम आदमी पार्टी 22 सीटों जीत का परचम लहराती दिख रही है. इस चुनाव में कई दिग्गज चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है. इसमें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, अवध ओझा, सौरभ भारद्वाज को हार मिली है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के रमेश बिधूड़ी को भी हार का सामना करना पड़ा है. इस बीच कुमार विश्वास ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला है.
कुमार विश्वास ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि सिसोदिया की हार पर उनकी पत्नी फूट-फूटकर रो पड़ीं. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार पर उन्होंने कहा, ‘देश के करोड़ों सपनों के हत्यारे को एक छोटा सा दंड मिला है. प्रकृति और नियति का बड़ा दंड उनकी प्रतीक्षा में है.’
केजरीवाल पर खुलकर बोले कुमार विश्वास
उन्होंने आगे कहा, ‘महाभारत की हार दुर्योधन की हार नहीं है, दुर्योधन की हार टूटी हुई जंघा लेकर अकेले रोने में है. दुर्योधन और दुशासन उस शिविर में जाएंगे अंततः. करोड़ों लोगों ने इस देश में एक वैकल्पिक राजनीति का एक सपना देखा था. और एक आत्म मुग्ध, नीच, अविश्वसनीय, असुरक्षित और चरित्रहीन व्यक्ति ने अपने आत्म मुग्धता के चक्कर में उसकी हत्या की.’
अपनी पत्नी का जिक्र करते हुए कुमार विश्वास ने कहा, ‘आप सभी मेरे परिवार से परिचित हैं. मेरी पत्नी कभी राजनीति में रुचि नहीं रखती थी. आज जैसे ही जंगपुरा का निर्णय आया वह फूट-फूट कर रोने लगी, क्योंकि उस मासूम महिला ने उस अपमान को झेला है, जहां एक कपड़े भर की सत्ता आने पर इन निर्लज लोगों ने अहंकार की पराकाष्ठा की थी.
भारतीय जनता पार्टी को बधाई देते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं बीजेपी को बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि दिल्ली के जख्मों पर वह अपने प्रशासन से मरहम लगाने का काम करेंगे. मैं प्रसन्न भी हूं कि न्याय मिला और दुखी भी हूं कि अपना 7 साल, अपना सपना, पसीना, नौकरी किसी वैकल्पिक राजनीति के लिए व्यर्थ किया. वह एक निर्लज व्यक्ति के अहंकार के कारण बलि चढ़ गए.’