बोकारो में फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा, दूसरों के नाम पर सिम लेकर साइबर अपराध का आरोप
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बोकारो में पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर दूसरे लोगों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर उनके नाम पर सिम कार्ड जारी कराता था। पुलिस के अनुसार, इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में किया जा रहा था। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
चास अनुमंडल के ASP वेदांत शंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बरमसिया ओपी पुलिस को सूचना मिली थी कि POS एजेंट प्रदीप दास ने जुलाई से अगस्त के बीच 140 से अधिक सिम कार्ड और मुकेश गोप ने 42 सिम कार्ड कथित तौर पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए।
पुलिस के मुताबिक, दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर इन सिम कार्डों को अवैध तरीके से सक्रिय कराया गया था। जांच में सामने आया कि इनका इस्तेमाल साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था।
सूचना के बाद ओपी प्रभारी और चंदनकियारी थाना प्रभारी के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई। पुलिस के अनुसार, हिरासत में पूछताछ के दौरान प्रदीप और मुकेश ने बताया कि वे पैसे के लालच में दूसरे लोगों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट लेकर सिम सक्रिय करते थे और उन्हें परमीत महथा, राहुल कुमार तथा विवेक चौधरी को उपलब्ध कराते थे। पुलिस के मुताबिक, इसके बदले उन्हें प्रति सिम 800 रुपये मिलते थे।
पुलिस का आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग साइबर अपराध के जरिए फर्जी बैंक खाते तैयार कर ठगी करते थे और ठगी की रकम आपस में बांट लेते थे।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एक Samsung Galaxy A17 5G मोबाइल, दो एयरटेल सिम कार्ड और एक Realme 12X 5G मोबाइल बरामद किया है, जिसमें एयरटेल और जियो के सिम लगे हुए थे।
मामले में साइबर थाना में IT Act और टेलीकॉम एक्ट की धारा 42(3)(e) के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
सावधान रहें: अपने आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें। अपने नाम पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं, इसकी समय-समय पर जांच भी करते रहें।