JSSC-CGL परीक्षा विवाद: 33 आरोपी जेल में, अब भी बड़े सवालों के घेरे में जांच

 

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एजेंट, दलाल और सफल अभ्यर्थियों पर कार्रवाई तेज, आयोग और परीक्षा व्यवस्था की भूमिका पर उठ रहे सवाल

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की परतें खुलती जा रही हैं। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम (SIT) लगातार कार्रवाई कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 33 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

हालिया कार्रवाई में मास्टरमाइंड बताए जा रहे सफल अभ्यर्थी अभय कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी, भाई अक्षय तिवारी, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ICN के कर्मी सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार समेत कई सफल अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा जमशेदपुर के फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार, स्वास्थ्य विभाग के कनीय सचिवालय सहायक अजय कुमार और रामाकृष्णा कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

जांच में ऐसे सफल अभ्यर्थियों की भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है, जिन पर खुद अनुचित लाभ लेने के साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें परीक्षा में पास कराने की व्यवस्था करने का आरोप है। CID के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर पहले से उपलब्ध कराकर रटवाए गए थे।

16 आरोपियों की गिरफ्तारी से शुरू हुई कार्रवाई

इस मामले में शुरुआती जांच के दौरान 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें कई झारखंड पुलिस के जवान भी शामिल थे। उन पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर पैसे वसूलने तथा प्रश्न-उत्तर रटवाने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद नए सिरे से जांच शुरू होने पर गिरफ्तारियों का सिलसिला और तेज हुआ।

पैसों का खेल और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल

जांच में सामने आए आरोपों के बाद सबसे बड़ा सवाल परीक्षा की निगरानी और पूरी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि परीक्षा से पहले ही कथित तौर पर पैसे का लेनदेन, प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और अभ्यर्थियों को तैयार कराने जैसी गतिविधियां चल रही थीं, तो इन गतिविधियों की भनक संबंधित व्यवस्था को समय रहते क्यों नहीं लगी?

क्या इतनी बड़ी कथित गड़बड़ी केवल बाहरी एजेंटों और अभ्यर्थियों के स्तर पर संभव थी? क्या परीक्षा संचालन की व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक हुई? जांच एजेंसी इन पहलुओं को भी खंगाल रही है। हालांकि, इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

JSSC कार्यालय और सचिव से भी पूछताछ

CID ने JSSC कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं। आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से भी पूछताछ की जा चुकी है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अब तक आयोग के किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ ऐसा ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है, जिसके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई हो।

CID की जांच अब गिरफ्तार आरोपियों के बयानों, वित्तीय लेनदेन, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के मिलान पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जांच का दायरा केवल एजेंटों और अभ्यर्थियों तक रहेगा, या परीक्षा व्यवस्था से जुड़े हर स्तर की जवाबदेही भी तय होगी?

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