धनबाद में निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस, ड्रेस और किताबों को लेकर नए नियम लागू

धनबाद में निजी स्कूलों पर सख्ती: फीस, ड्रेस और किताबों को लेकर नए नियम लागू

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, अब अभिभावकों को मिलेगी राहत

धनबाद में निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्क को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई सख्त नियम लागू किए गए हैं, जिससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

धनबाद जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। अब सभी निजी विद्यालयों को वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट फीस और अन्य शुल्क का पूरा विवरण अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा।
सबसे बड़ी राहत अभिभावकों को यह दी गई है कि अब स्कूल किसी भी अभिभावक पर एकमुश्त वार्षिक फीस जमा करने का दबाव नहीं बना सकेंगे। अभिभावक अब वार्षिक शुल्क को क्वार्टरली (तीन महीने के अंतराल में) जमा कर सकेंगे।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल री-एडमिशन के नाम पर फीस नहीं वसूल सकेगा। साथ ही स्कूलों को डेवलपमेंट फीस लेने का उद्देश्य भी स्पष्ट करना होगा।
इसके अलावा, स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अगले सत्र के लिए नवंबर तक किताबों और ड्रेस का पूरा विवरण (किताब का नाम और प्रकाशक सहित) अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। वहीं जनवरी तक फीस का पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक करना होगा।
एक और बड़ा फैसला यह है कि कोई भी स्कूल 5 साल से पहले अपनी ड्रेस नहीं बदल सकेगा और न ही तय की गई किताबों में बदलाव कर सकेगा।
प्रशासन ने स्कूलों को परिसर में किताबें और ड्रेस बेचने से भी रोक दिया है, जिससे अभिभावक खुले बाजार से सस्ती दरों पर सामान खरीद सकेंगे।

उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि सभी स्कूल एक सप्ताह के अंदर इन नियमों का पालन सुनिश्चित करें। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित पांच सदस्यीय टीम औचक निरीक्षण करेगी। नियमों का उल्लंघन करने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

स्कूलों को पिछले एक वर्ष का ऑडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट जमा करना होगा
सभी शिक्षकों का नाम और वेतन विवरण वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा
स्कूलों को “Not for Profit” सिद्धांत पर चलने का निर्देश
बीपीएल कोटे में 25% सीट आरक्षित रखने का आदेश
स्कूल बस/वैन ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य
सभी स्कूल वाहनों में CCTV और GPS जरूरी
बच्चों की मानसिक स्थिति की निगरानी और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग

जिला प्रशासन के इन सख्त फैसलों से साफ है कि अब निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की पूरी तैयारी है। आने वाले समय में इन नियमों का असर सीधे तौर पर अभिभावकों और छात्रों को राहत देगा।

About Author

error: Content is protected !!