बंगाल से बिहार तक ‘मांगुर मछली सिंडिकेट’ का काला खेल, झारखंड बना ट्रांजिट हब
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रोज 25–30 गाड़ियों से हो रही प्रतिबंधित मछली की तस्करी, करोड़ों का अवैध कारोबार—प्रशासन पर उठे सवाल
कोयला, बालू और पत्थर तस्करी के लिए बदनाम झारखंड में अब एक नया अवैध नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। यह नेटवर्क है प्रतिबंधित मांगुर मछली (अफ्रीकन कैटफिश) की तस्करी का, जिसकी जड़ें पश्चिम बंगाल से जुड़ी बताई जा रही हैं और जिसका फैलाव बिहार तक देखा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतना बड़ा नेटवर्क होने के बावजूद कार्रवाई बेहद सीमित नजर आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध कारोबार का संचालन पूरी तरह संगठित तरीके से किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में बड़े स्तर पर मांगुर मछली की सप्लाई तैयार की जाती है, जिसके बाद इसे झारखंड के रास्ते बिहार भेजा जाता है।
झारखंड इस पूरे नेटवर्क में ट्रांजिट कॉरिडोर की भूमिका निभा रहा है।
हर दिन 25 से 30 छोटे मालवाहक वाहन इस मछली को सीमाओं के पार ले जा रहे हैं।
मुख्य रूट
पश्चिम बंगाल
धनबाद सीमा
गिरिडीह
हजारीबाग
बिहार
यह रूट लगातार सक्रिय बताया जा रहा है, जहां निगरानी के बावजूद तस्करी रुक नहीं पा रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, मांगुर मछली यानी अफ्रीकन कैटफिश एक विदेशी प्रजाति है जो स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा मानी जाती है।
यह स्थानीय मछलियों को नुकसान पहुंचाती है
जल संतुलन बिगाड़ती है
तेजी से फैलकर अन्य प्रजातियों को खत्म कर सकती है
इसी कारण इसके पालन, बिक्री और परिवहन पर भारत में प्रतिबंध लगाया गया है।
करोड़ों का कारोबार, लेकिन कार्रवाई कम
जांच में संकेत मिले हैं कि इस अवैध नेटवर्क से हर महीने करोड़ों रुपये का लेन-देन हो रहा है। इसके बावजूद बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं के बराबर दिख रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है:
कई जगह यह कारोबार खुलेआम चलता है
छापेमारी होती है, लेकिन असर सीमित रहता है
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस पूरे मामले में मत्स्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
छिटपुट कार्रवाई हो रही है
लेकिन कोई बड़ा नेटवर्क अभी तक नहीं तोड़ा गया
समन्वित अभियान की कमी साफ नजर आती है
सबसे बड़ा सवाल ??
अगर रोजाना दर्जनों गाड़ियां सीमाओं से गुजर रही हैं, तो निगरानी तंत्र कहां है?
क्या सिस्टम में कहीं बड़ी चूक है?
या फिर यह सिंडिकेट इतना मजबूत हो चुका है कि उस तक पहुंचना मुश्किल है?
प्रतिबंधित मांगुर मछली की तस्करी सिर्फ एक अवैध कारोबार नहीं, बल्कि यह पर्यावरण और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।