रांची : कोल स्कैम मामले में सीबीआई की जांच में महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है. सीबीआई की जांच में पता चला है कि अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने कोयला ब्लॉक हासिल करने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर हजारीबाग में निजी जमीन की खरीद का फर्जी दस्तावेज पेश किया गया था. इसके अलावा प्लांट के लिए मशीनरी की खरीद और बैंकों के साथ वित्तीय गठजोड़ से संबंधित जाली दस्तावेजों की फोटोकॉपी भी प्रस्तुत की गयी थी. सीबीआई ने कहा कि इन जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कोयला ब्लॉकों के आवंटन के लिए भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय की सिफारिश हासिल करने के लिए किया गया था. इस सिफारिश के आधार पर कोयला मंत्रालय ने 25 जून 2005 को अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (अब अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) को बृंदा, सिसई और मेराल कोयला ब्लॉक आवंटित किये थे.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कोर्ट ने प्रबंध निदेशक और पूर्व निदेशक को ठहराया दोषी
सीबीआई की एक विशेष अदालत ने सोमवार को झारखंड में बृंदा, सिसई और मेराल कोयला ब्लॉकों के आवंटन से संबंधित कोयला घोटाला मामले में अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार जायसवाल और इसके पूर्व निदेशक रमेश कुमार जायसवाल को दोषी ठहराया है. विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने नागपुर स्थित अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (एआईपीएल), इसके प्रबंध निदेशक मनोज कुमार जायसवाल और पूर्व निदेशक रमेश कुमार जायसवाल को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने के लिए दोषी ठहराया. उनकी सजा बाद में सुनायी जायेगी