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धनबाद | दक्षिणी टुंडी
धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड अंतर्गत कदैयाँ गांव में चल रहा अवैध पत्थर खनन कार्य अब ग्रामीणों के लिए जीवन, स्वास्थ्य, आस्था और शिक्षा से जुड़ा गंभीर संकट बन गया है। ग्रामीणों ने खननकर्ता संतोष चौरसिया पर आरोप लगाया है कि उसने सरकारी मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर खनन शुरू किया है, जिससे पूरे इलाके में भारी जन असंतोष फैल गया है।
पेयजल संकट: चेक डैम में गिर रही गंदगी, तीन गांवों को मिल रहा दूषित पानी
खनन स्थल से 100 मीटर की दूरी पर स्थित एकमात्र चेक डैम से तीन गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति होती है। लेकिन खनन से निकली मिट्टी, पत्थर और गंदगी सीधे नदी में बह रही है, जो चेक डैम में जमा होकर पानी को पूरी तरह प्रदूषित कर रही है। ग्रामीणों को अब दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
धार्मिक स्थल, विद्यालय और फार्म हाउस खतरे में
50 मीटर की दूरी पर स्थित कब्रिस्तान में पत्थर के टुकड़े गिर रहे हैं, जिससे धार्मिक भावना को ठेस पहुंच रही है।
200 मीटर दूरी पर स्थित मध्य विद्यालय केशका, नौनिहाल के बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर खतरा है। ब्लास्टिंग और धूल से विद्यालय का वातावरण खराब हो गया है।
100 मीटर पर स्थित बकरी फार्म और डेयरी फार्म भी लगातार ध्वनि और कंपन से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पशुओं पर खतरा मंडरा रहा है।
सड़कें टूटीं, खेत बंजर, नदी पटी
खनन स्थल से लगातार चल रहे 16/18 चक्का ओवरलोड हाइवा वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं।
20 फीट से अधिक गहराई में बोरिंग और हेवी ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं, खेतों की उपजाऊ मिट्टी उखड़ चुकी है, और नदी का प्राकृतिक प्रवाह भी अवरुद्ध हो गया है।
विरोध पर धमकी: “जो करना है कर लो, खनन नहीं रुकेगा”
जब ग्रामीणों ने संतोष चौरसिया से खनन रोकने की मांग की, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा —
“जो करना है कर लो, खनन बंद नहीं होगा। मेरी पहुँच बहुत ऊपर तक है।”
इससे लोगों में भय और आक्रोश और बढ़ गया है।
ग्रामीणों की माँगें
खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए
चेक डैम की सफाई कर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए
धार्मिक, शैक्षणिक और पशुपालन स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
ओवरलोड वाहनों की आवाजाही बंद की जाए
गलत सर्वे की जांच और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने अंचल अधिकारी को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है और जिला स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग की है। लेकिन समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जनता में गहरा रोष व्याप्त है।
“जब शिक्षा, धर्म, स्वास्थ्य और जीवन सब खतरे में
हैं, तो प्रशासन की चुप्पी क्या दर्शाती है?”