GST Scam Jharkhand: 31 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा, 200 करोड़ की फर्जी इनवॉइस से हिली प्रशासनिक व्यवस्था
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!धनबाद/जमशेदपुर, 25 जुलाई 2025:
झारखंड में GST सिस्टम को चकमा देकर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी करने का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यह घोटाला न केवल टैक्स चोरी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली की खामियों को भी उजागर करता है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
1. अवनीश जायसवाल (निवासी – हीरापुर, धनबाद)
पेशा: व्यापार से जुड़ा व्यक्ति
पूर्व में स्टील और कोयला ट्रांसपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों में संलिप्त रहा है।
2. मोहम्मद फैजल खान (निवासी – मटकुरिया, धनबाद)
पेशा: जीएसटी कंसल्टेंसी से जुड़ा, डिजिटल दस्तावेज़ प्रोसेसिंग का काम करता था
आरोप: फर्जी कंपनियों के दस्तावेज़ तैयार कराने और डिजिटल हस्ताक्षर की सेटिंग में माहिर
कैसे खड़ी की गईं 12 फर्जी कंपनियां?
फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट आदि का उपयोग कर कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कराया गया।
कंपनियों के पते झारखंड, बंगाल, और ओडिशा के रिमोट इलाकों में दिखाए गए ताकि वे फिजिकल वेरिफिकेशन से बच जाएं।
GSTN (Goods & Services Tax Network) पोर्टल पर सबकुछ वैध दिखाने के लिए फर्जी बैंक अकाउंट्स और फोन नंबर उपयोग किए गए।
इनवॉइस फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
12 कंपनियों ने कोयला, टीएमटी बार, सीमेंट और स्क्रैप मटेरियल की खरीद-बिक्री दर्शाई
असली में कोई सामान का ट्रांजैक्शन नहीं हुआ
यह सब सिर्फ इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के अवैध दावे के लिए किया गया
आरोपियों ने अलग-अलग नाम से कोयला, लोहा, टीएमटी और सीमेंट कारोबार की 12 फर्जी कंपनियों का पंजीकरण कराया था. कंपनियों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर इनवॉइस के माध्यम से करोड़ों का कारोबार दर्शाया गया, जबकि वास्तव में कोई लेन-देन नहीं हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि घोटाले के तार और भी कई जगहों से जुड़े हो सकते हैं. कुछ बड़े कारोबारी या बिचौलिये के भी शामिल होने की आशंका है. मामले की पड़ताल के दौरान आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है.
फर्जी खरीद दिखाकर जीएसटी रिटर्न में हेराफेरी की गई और सरकारी खजाने को ₹31 करोड़ का नुकसान हुआ
तकनीकी धोखाधड़ी: डिजिटल डिवाइस से मिले प्रमाण
DGGI टीम को छापेमारी में 4 लैपटॉप, 10 मोबाइल, और 6 पेन ड्राइव मिली
इसमें फर्जी GST रिटर्न की फाइलें, ईमेल कम्युनिकेशन, डिजिटल हस्ताक्षर सॉफ्टवेयर, और फर्जी रजिस्ट्रेशन पोर्टल यूजरनेम-पासवर्ड्स पाए गए
जांच में मिले कई बैंक खातों का विवरण — जो ई-वॉलेट या ग्रामीण बैंकों में खुले थे
DGGI की कार्रवाई
मार्च 2025: पहली इनवॉइस की असमानता DGGI पटना जोन को मिली
अप्रैल – जून 2025: डमी कंपनियों की लोकेशन ट्रेसिंग और GST नेटवर्क एनालिसिस
22 जुलाई 2025: ऑपरेशन धनबाद शुरू, लोकल पुलिस को अलर्ट किए बिना निगरानी
24 जुलाई: गिरफ्तारी के बाद जमशेदपुर कार्यालय में पूछताछ, मेडिकल, जेल भेजा गया
कौन और शामिल हो सकते हैं?
DGGI अधिकारी का बयान
“हमारे पास डिजिटल सबूत और बैंक लेन-देन की लंबी फेहरिस्त है। यह घोटाला अकेले दो लोगों का नहीं हो सकता। जल्दी ही बड़े नाम सामने आएंगे।”
— सार्थक सक्सेना, अपर निदेशक, DGGI जमशेदपुर