14511 वोटों के अंतर से झरिया पर एक बार फिर सिंह मेन्शन का हुआ कब्ज़ा

14511 वोटों के अंतर से झरिया पर एक बार फिर सिंह मेन्शन का हुआ कब्ज़ा

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धनबाद: धनबाद में सबसे हॉट सीट बनी झरिया सीट एक बार फिर सिंह मेंशन के पास चली आई है. रागिनी सिंह इस सीट पर चुनाव जीती है. अब तक सबसे अधिक बार सिंह मेंशन का परिवार ही इस सीट पर काबिज रहा है. इसके पहले रागिनी सिंह के ससुर सूर्यदेव सिंह,सास कुंती सिंह , पति संजीव सिंह,गोतनी पूर्णिमा नीरज सिंह चुनाव जीते थे. अब रागिनी सिंह पहली बार विधायक बनी है. यह अलग बात है कि झरिया में कांटे की लड़ाई थी. जेठानी और देवरानी के बीच चुनावी लड़ाई को लेकर तनाव भी था. लेकिन प्रशासनिक चुस्ती के कारण झरिया में कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ. रागिनी सिंह की जीत के साथ ही सिंह मेंशन की झरिया सीट पर सबसे अधिक बार जीतने का रिकॉर्ड बनाया. सूर्य देव सिंह लगातार चार बार 1977, 1980, 1985 और 1990 में झरिया से विधायक बने थे.

1991 में सूर्यदेव सिंह का हो गया था निधन

1991 में उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में जनता दल के टिकट पर आबो देवी चुनाव जीत गई थी. उसके बाद 1995 में भी आबो देवी ने जीत दर्ज की. साल 2000 में समता पार्टी के टिकट पर सूर्य देव सिंह के भाई बच्चा सिंह चुनाव जीते थे. उसके बाद 2005 में सूर्यदेव सिंह की पत्नी कुंती सिंह चुनाव जीती. 2009 में भी कुंती सिंह ही विजय रही . उसके बाद 2014 में संजीव सिंह चुनाव जीते. संजीव सिंह अपने चचेरे भाई कांग्रेस नेता नीरज सिंह को पराजित किया था. लेकिन 2019 के चुनाव में नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी और उन्होंने रागिनी सिंह को पराजित कर दिया. इसका बदला रागिनी सिंह ने 2024 के चुनाव में ले लिया. रागनी सिंह को 87892 मत मिले तो पूर्णिमा नीरज सिंह को 73381 वोट पर संतोष करना पड़ा.

धनबाद की झरिया देश की अनूठी कोयला बेल्ट है

धनबाद की झरिया देश की अनूठी कोयला बेल्ट है. दुनिया भर से अच्छी गुणवत्ता का कोयला झरिया में ही मिलता है. विशेषता यह भी है कि यह कोयला जमीन के बहुत करीब होता है. कोयला खनन का यहाँ इतिहास बहुत पुराना है. 1884 से झरिया इलाके में कोयला का खनन किया जा रहा है. भूमिगत आग का पता भी 1919 में इसी इलाके से चला. कोयलांचल की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र पहले झरिया थी. आज भी कमोवेश है. विशेषता यह है कि कोयला जमीन के नजदीक उपलब्ध हो जाता. फिलहाल जमीन के नीचे आग लगी हुई है, तो जमीन के ऊपर “राजनीतिक आग” भी जल रही है. यह इलाका दबंगई के लिए भी जाना जाता है.

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