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रांची। झारखंड की जेलों में बड़े पैमाने पर रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अपने पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं होने पर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सचिव और राज्य के गृह सचिव को शोकॉज नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है कि आदेश की अवहेलना के मामले में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।
छह सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की मांग खारिज
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के लिए राज्य सरकार की ओर से छह सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगने संबंधी हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी। वहीं, JPSC की ओर से भी अतिरिक्त समय दिए जाने का अनुरोध किया गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
जेलों में 81 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त
यह मामला राज्य की जेलों की व्यवस्था में सुधार और मॉडल जेल मैनुअल के प्रावधानों के अनुपालन से जुड़ी स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत को बताया गया कि झारखंड की जेलों में 81 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से जेलों के प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
छह महीने में नियुक्ति पूरी करने का था निर्देश
इससे पहले हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि जेलों में खाली पड़े सभी पदों को छह महीने के भीतर हर हाल में भरा जाए। निर्धारित समयसीमा में आदेश के अनुपालन को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई है।
अब JPSC सचिव और गृह सचिव को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले में अदालत का अगला रुख अधिकारियों के जवाब और नियुक्ति प्रक्रिया की स्थिति पर निर्भर करेगा।