हर हिंदू का गोत्र होता है, जिसका गोत्र नहीं वह हिंदू नहीं – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
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Swami Avimukteshwaranand Saraswati ने कहा है कि हर हिंदू की पहचान उसके गोत्र से होती है और जिसका कोई गोत्र नहीं होता वह हिंदू नहीं हो सकता। उन्होंने गौमाता की रक्षा को हिंदू समाज की सबसे बड़ी पहचान बताया।

रविवार सुबह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रायबरेली से अपने परिकरों के साथ उन्नाव के लिए रवाना हुए। प्रातःकालीन पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने ट्रेन में हुए हमले के मामले में हिस्ट्रीशीटर आशुतोष की सुरक्षा और घटना की जांच की मांग की।

शंकराचार्य ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार ट्रेन के कोच अटेंडेंट ने बताया कि जब तक आशुतोष बाथरूम नहीं गया था तब तक सब ठीक था, लेकिन बाहर निकलने पर वह लहूलुहान हालत में दिखाई दिया। उन्होंने इस मामले में पूरी जांच कराने की बात कही।

रायबरेली से निकलने के बाद उनका काफिला लालगंज पहुंचा, जहां उन्होंने मां दुर्गा और दुखभंजन हनुमान मंदिर में दर्शन किए। मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की पहचान गौमाता की रक्षा से है। देश के अलग-अलग हिस्सों में भले ही कई विविधताएं हों, लेकिन हर हिंदू का गोत्र होता है और गोत्र का अर्थ ही गौमाता की रक्षा से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज देश में गायों पर अत्याचार हो रहा है और गौहत्या अभी भी बंद नहीं हुई है। आजादी के समय नेताओं ने वादा किया था कि अंग्रेजों के जाने के बाद गौहत्या बंदी का कानून बनाया जाएगा, लेकिन आजादी के 78 साल बाद भी यह कानून लागू नहीं हो पाया।
शंकराचार्य ने कहा कि जो गाय को माता मानते हैं वही असली हिंदू हैं, जबकि जो गाय को केवल पशु मानते हैं वे नकली हिंदू हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की सरकारें गाय के मांस से होने वाली आय को बढ़ावा दे रही हैं, जबकि गौभक्त गौमाता की रक्षा की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने घोषणा की कि 11 मार्च को दोपहर 2:15 बजे लखनऊ से “गौप्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध” का शंखनाद किया जाएगा। धर्मसभा में मौजूद लोगों से जब उन्होंने पूछा कि क्या यह धर्मयुद्ध होना चाहिए, तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया और पूरा पंडाल “गौमाता राष्ट्रमाता” के नारों से गूंज उठा।
इस दौरान सुमित यादव ने शंकराचार्य का पादुका पूजन किया। कार्यक्रम में राघवेन्द्र सिंह, नीरज मिश्रा, सूर्य प्रकाश सिंह, पुनीत यादव, लावेन्द्र, अतुल यादव, संतोष सिंह और राजेन्द्र सिंह समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
बाद में शंकराचार्य उन्नाव पहुंचे, जहां एक बैंक्वेट हॉल में एडवोकेट सतीश शुक्ला ने उनका पादुका पूजन किया। धर्मसभा के बाद वे होटल सेलीब्रेशन में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे। सोमवार सुबह वे नेमिषारण्य के लिए रवाना होंगे।