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कोडरमा। झुमरीतिलैया स्थित सीडी बालिका मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में बुधवार (3 नवंबर) को उस समय अजीबोगरीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब प्रभारी प्रधानाध्यापक कुमार शशि भूषण सिंह के निलंबन के विरोध में छात्राएं खुलकर सामने आ गईं। छात्राओं ने अपने प्रिय शिक्षक को विद्यालय से जाने से रोक दिया और उन्हें वापस स्कूल परिसर में ले जाकर विभागीय कार्रवाई के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने 2 नवंबर को प्रभारी प्रधानाध्यापक कुमार शशि भूषण सिंह को निलंबित कर दिया था। इसके बाद 3 नवंबर को जब वे विद्यालय का प्रभार सौंपकर स्कूल से बाहर निकल रहे थे, तभी छात्राओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। देखते ही देखते छात्राएं स्कूल का गेट खोलकर बाहर निकल आईं और निलंबित शिक्षक को वापस विद्यालय परिसर में ले गईं। इस दौरान विद्यालय में काफी देर तक हंगामा होता रहा।
छात्राओं का कहना था कि शशि भूषण सिंह के विद्यालय में पदस्थापित होने के बाद पठन-पाठन की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय का शैक्षणिक स्तर और परीक्षा परिणाम भी बेहतर हुआ है। ऐसे शिक्षक को निलंबित करना उचित नहीं है। छात्राओं ने विभाग से निलंबन आदेश वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जब तक उनके शिक्षक को न्याय नहीं मिलता, उनका विरोध जारी रहेगा।
शिक्षक को रोकने की आपाधापी में विद्यालय परिसर में कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कुछ छात्राओं को मामूली चोटें आने की भी सूचना है। बाद में शशि भूषण सिंह के वापस विद्यालय परिसर में आने के बाद स्थिति शांत हुई। हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
कोचिंग संस्थान के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों को दे चुके हैं शिक्षा
सरकारी शिक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभालने से पहले कुमार शशि भूषण सिंह ‘Shashi Institute of Science’ के नाम से कोचिंग संस्थान भी संचालित करते थे। उनके संस्थान से हजारों विद्यार्थियों ने शिक्षा प्राप्त की है। इनमें से कई विद्यार्थी आज विभिन्न सरकारी विभागों और सेवाओं में कार्यरत होकर राज्य एवं देश की सेवा कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को लेकर विद्यार्थियों के बीच उनकी अलग पहचान बताई जाती है।
शिक्षा विभाग को निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए
जिस शिक्षक के प्रति छात्राओं में इतना विश्वास, सम्मान और अपनापन देखने को मिल रहा है, उनके निलंबन के मामले में शिक्षा विभाग को एक बार पुनः गंभीरता से विचार करना चाहिए। विभाग को पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करते हुए छात्राओं की भावनाओं और शिक्षक के शैक्षणिक योगदान को भी ध्यान में रखना चाहिए। यदि किसी प्रकार की त्रुटि हुई है तो उसका निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
आखिरकार शिक्षा का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का भविष्य संवारना भी है। छात्राओं के इस विरोध को शिक्षा विभाग को एक गंभीर संदेश के रूप में लेना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि छात्राओं के विरोध और उठ रही मांगों के बाद शिक्षा विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है।